जन्म विवरण एवं पंचांग
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जन्म विवरण एवं पंचांग — जिस दिन आप जन्मे उसके पाँच अंग, और तारीख़ जितना ही मिनट और स्थान क्यों मायने रखते हैं।
0समय और स्थान गौण क्यों नहीं
तारीख़ से ग्रह राशि तक तय हो जाते हैं। बाक़ी सब — लग्न, भाव, कौन-सा ग्रह किस भाव में, और जन्म किस दशा में हुआ — मिनट और अक्षांश-देशांतर से निकलता है। लग्न हर दो घंटे में बदलता है और चंद्रमा लगभग एक दिन में पूरा नक्षत्र पार कर लेता है, इसलिए एक घंटे की भूल भाव बदल देती है और एक दिन की भूल दशा। याद से बताए समय की कुंडली एक अनुमान है, और ईमानदार सॉफ़्टवेयर उसे सेकंड तक छापने के बजाय यह कह देगा।
पंचांग के पाँच अंग
पंचांग का अर्थ ही है पाँच अंग। इनमें से हर एक उस दिन और स्थान का गुण है, व्यक्ति का नहीं।
- तिथि
- चंद्र दिवस — महीने में 30, सूर्य से चंद्रमा की दूरी 12° के चरणों में गिनकर।
- वार
- सप्ताह का दिन और उसका स्वामी ग्रह — यही इकलौता अंग है जो अंशों से नहीं, सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है।
- नक्षत्र
- चंद्रमा कहाँ है, 13°20' के 27 भागों में — दशा यही तय करता है।
- योग
- 27, सूर्य और चंद्रमा के अंश जोड़कर निकाले जाते हैं।
- करण
- आधी तिथि — 11 करण, हर तिथि में दो।
इस पर कुछ करना हो तो
ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।
अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जन्म समय इतना क्यों मायने रखता है?
- तारीख़ से ग्रह राशि तक तय हो जाते हैं। बाक़ी सब — लग्न, भाव, कौन-सा ग्रह किस भाव में, और जन्म किस दशा में हुआ — मिनट और अक्षांश-देशांतर से निकलता है। लग्न हर दो घंटे में बदलता है और चंद्रमा लगभग एक दिन में पूरा नक्षत्र पार कर लेता है, इसलिए एक घंटे की भूल भाव बदल देती है और एक दिन की भूल दशा। याद से बताए समय की कुंडली एक अनुमान है, और ईमानदार सॉफ़्टवेयर उसे सेकंड तक छापने के बजाय यह कह देगा।
- पंचांग के पाँच अंग कौन-से हैं?
- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — चंद्र दिवस, सप्ताह का दिन, चंद्रमा का विभाग, सूर्य-चंद्र का योग, और आधी तिथि।
