जानें
जैसे किसी से पूछते हैं, वैसे ही पूछिए
सरल भाषा में एक सौ सत्ताईस पन्ने — दोष, नक्षत्र, गुण मिलान के कूट, चौदह देवता, और वे चौंसठ अध्याय जिनसे पूरी कुंडली बनती है। अपने ही शब्दों में खोजिए; यह जानना ज़रूरी नहीं कि जवाब किस पन्ने पर है।
कुंडली के 64 अध्याय
हर भाव, हर ग्रह, हर वर्ग कुंडली — वही अध्याय जो आपकी रिपोर्ट में बनते हैं, यहाँ खुले तौर पर समझाए हुए।
- 1इस रिपोर्ट के बारे में
- 2जन्म विवरण एवं पंचांग
- 3आपकी जन्म कुंडली
- 4मुख्य ग्रह स्थितियाँ
- 5लग्न विश्लेषण
- 6चंद्र राशि एवं नक्षत्र
- 7भाव 1 — स्वयं एवं शरीर
- 8भाव 2 — धन एवं वाणी
- 9भाव 3 — भाई-बहन एवं साहस
- 10भाव 4 — घर एवं माता
- 11भाव 5 — बुद्धि एवं संतान
- 12भाव 6 — रोग एवं शत्रु
- 13भाव 7 — विवाह एवं साझेदारी
- 14भाव 8 — आयु एवं परिवर्तन
- 15भाव 9 — भाग्य एवं पिता
- 16भाव 10 — कर्म एवं प्रतिष्ठा
- 17भाव 11 — लाभ एवं संपर्क
- 18भाव 12 — व्यय एवं मोक्ष
- 19सूर्य — विस्तृत विश्लेषण
- 20चंद्र — विस्तृत विश्लेषण
- 21मंगल — विस्तृत विश्लेषण
- 22बुध — विस्तृत विश्लेषण
- 23गुरु — विस्तृत विश्लेषण
- 24शुक्र — विस्तृत विश्लेषण
- 25शनि — विस्तृत विश्लेषण
- 26राहु — विस्तृत विश्लेषण
- 27केतु — विस्तृत विश्लेषण
- 28षड्बल — ग्रह बल
- 29अष्टकवर्ग — सारांश
- 30सर्वाष्टकवर्ग
- 31D2 होरा — धन
- 32D3 द्रेष्काण — भाई-बहन
- 33D4 चतुर्थांश — संपत्ति
- 34D7 सप्तांश — संतान
- 35D9 नवांश — विवाह एवं धर्म
- 36D10 दशांश — कर्म
- 37D12 द्वादशांश — माता-पिता
- 38D16 षोडशांश — वाहन एवं सुख
- 39D20 विंशांश — आध्यात्मिक मार्ग
- 40D24 चतुर्विंशांश — शिक्षा
- 41D27 भांश — बल एवं दुर्बलता
- 42D30 त्रिंशांश — कष्ट
- 43D40, D45, D60 — सूक्ष्म विवरण
- 44राज योग
- 45धन योग
- 46पंच महापुरुष एवं अरिष्ट योग
- 47दोष विश्लेषण
- 48विंशोत्तरी — पूर्ण क्रम
- 49वर्तमान महादशा विस्तार से
- 50अंतर्दशा समयरेखा
- 51प्रत्यंतर — अगले 24 महीने
- 52गोचर — शनि
- 53गोचर — गुरु
- 54गोचर — राहु एवं केतु
- 55करियर एवं व्यवसाय
- 56धन एवं वित्त
- 57विवाह एवं संबंध
- 58संतान एवं परिवार
- 59स्वास्थ्य एवं आयु
- 60शिक्षा एवं अध्ययन
- 61संपत्ति एवं वाहन
- 62आध्यात्मिक मार्ग
- 63उपाय
- 64इस रिपोर्ट का उपयोग कैसे करें
नक्षत्र
सत्ताईस नक्षत्र
हर नक्षत्र का स्वामी, चारों पाद और उनके नामाक्षर, और गण–नाड़ी–योनि — जो मिलान के आठ में से तीन कूट अकेले तय करते हैं।
गुण मिलान
अष्टकूट के आठ कूट
छत्तीस अंक किन आठ हिस्सों से बनते हैं — हर कूट की पूरी अंक-तालिका, किन जोड़ों को शून्य मिलता है, और सत्ताईस नक्षत्रों के 729 जोड़ों में वह कितनी बार होता है।
दो कुंडलियाँ मिलाइए →देवता
चौदह देवता और उनके ग्रह
किस दोष या ग्रह के लिए किस देवता की उपासना कही गई है, वह किस ग्रह से जुड़े हैं, और शास्त्र में उनके लिए क्या विधि बताई गई है।
चौदह दोष, विस्तार से
मांगलिक दोष
मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में — दोष कैसे बनता है, दस शास्त्रीय निवारण, और क्या करें।
मंगलपढ़िएकालसर्प दोष
सातों ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर। कुंडली क्या कह रही है, और शास्त्रोक्त उपाय।
राहु एवं केतु (चंद्र-नोड)पढ़िएसाढ़ेसाती
साढ़े साती वास्तव में क्या है, इसके तीन चरण, कब चलती है, और शास्त्र क्या कहते हैं।
शनिपढ़िएपितृ दोष
कुंडली में पितृ ऋण — कैसे पहचाना जाता है, किन क्षेत्रों को प्रभावित करता है, और शास्त्रोक्त उपाय।
सूर्य एवं नवम भावपढ़िएगुरु चांडाल दोष
जब ज्ञान का ग्रह नोड से मिलता है। युति कैसे आँकी जाती है, क्या प्रभावित होता है, और निवारण।
राहु/केतु से पीड़ित गुरुपढ़िएश्रापित दोष
'श्रापित' योग — कुंडली में यह वास्तव में क्या दर्शाता है, और इसके उपाय।
शनि + राहुपढ़िएअंगारक दोष
मंगल और राहु साथ — उग्रता का योग। युति कितनी निकट होनी चाहिए, और शमन के उपाय।
मंगल + राहुपढ़िएग्रहण दोष
जन्म कुंडली में ग्रहण योग — कैसे मापा जाता है, किसे प्रभावित करता है, और शास्त्रोक्त उपाय।
राहु/केतु से ग्रसित सूर्य/चन्द्रपढ़िएविष योग
जिसे चंद्र दोष भी कहते हैं। चंद्र-शनि युति क्या दर्शाती है, और शास्त्र क्या सुझाते हैं।
चन्द्र + शनिपढ़िएकेमद्रुम दोष
चंद्रमा के दोनों ओर द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह नहीं। मन और मनोबल पर इसका क्या अर्थ है, और कौन-सी स्थितियाँ इसे निरस्त कर देती हैं।
एकाकी चन्द्रपढ़िएपाप कर्तरी योग
जब कोई भाव या ग्रह दो पाप ग्रहों के बीच फँस जाए। कैसे आँका जाता है और क्या रोकता है।
लग्न के दोनों ओर पाप-ग्रहपढ़िएशकट दोष
शकट योग — चंद्र और गुरु का 6-8 सम्बन्ध क्या दर्शाता है, और इसकी सीमाएँ।
चन्द्र-गुरु संबंधपढ़िएगण्डमूल दोष
छह गंडांत नक्षत्र, इनमें जन्म क्यों देखा जाता है, और शास्त्रोक्त गंडमूल शांति।
संधि नक्षत्रपढ़िएदरिद्र दोष
यह योग जितना उद्धृत होता है, उतना जाँचा नहीं जाता। क्या बनाता है, क्या नहीं, और कैसे पढ़ें।
एकादशेश द्वादश भाव मेंपढ़िए
यह सामग्री हमारे गणना-इंजन से निकली है, उसके आसपास लिखी नहीं गई। इन पन्नों का हर नियम वही है जो एक ग्राहक की कुंडली पर चलता है — वहाँ बदलेगा तो यहाँ भी बदलेगा।
कहीं अटक गए, या कुछ ठीक नहीं लग रहा?
हर संदेश एक इंसान पढ़ता है — कोई बॉट नहीं। अपनी कुंडली, रिपोर्ट, भुगतान या ऑर्डर — किसी भी बारे में पूछिए। सुबह 9 से रात 9, रोज़।
