करियर एवं व्यवसाय

अंतिम अपडेट

कुंडली में करियर एवं व्यवसाय — किन भावों से पढ़ा जाता है, कौन-से ग्रह इसके कारक हैं, और कौन-सी वर्ग कुंडली इसकी पुष्टि करती है।

0

यह किन भावों से पढ़ा जाता है

करियर एवं व्यवसाय सबसे पहले दशम भाव से पढ़ा जाता है, जो कर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार एवं सार्वजनिक भूमिका का है। कोई एक भाव इसे तय नहीं करता: षष्ठ भाव, एकादश भाव और द्वितीय भाव साथ में देखे जाते हैं, और कारक शनि, सूर्य और बुध पूरी कुंडली में जहाँ भी हों वहाँ से। भाव मजबूत और कारक कमजोर — या उल्टा — यही सामान्य स्थिति है। इसीलिए जिन दो लोगों का दशम भाव एक जैसा दिखता है, उनका भी यह अध्याय अलग निकलता है।

कैसे तय होता है

चार चीज़ें, इसी क्रम में: दशम भाव का स्वामी कहाँ गया और वहाँ किस दशा में है; भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं; बाहर से किसकी दृष्टि पड़ रही है; और शनि, सूर्य और बुध क्या कर रहे हैं। फिर D10 दूसरी राय की तरह देखी जाती है — जो भाव जन्म कुंडली में मजबूत हो पर अपनी वर्ग कुंडली में टूटा हो, वह फल नहीं देता; अच्छा दिखने वाला अध्याय कमजोर निकलने का यही सबसे आम कारण है। समय सबसे अंत में, दशा से: भाव अपना फल तब देता है जब उसका स्वामी या कारक चल रहा हो।

क्या-क्या देखा जाता है

दशम भाव
मुख्य भाव — कर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार एवं सार्वजनिक भूमिका।
षष्ठ भाव
साथ में — रोग, ऋण, प्रतिस्पर्धा एवं दैनिक सेवा।
एकादश भाव
साथ में — आय, बड़े भाई-बहन, मित्र एवं इच्छापूर्ति।
द्वितीय भाव
साथ में — संचय, कुटुंब, भोजन एवं वाणी।
शनि (कारक)
अनुशासन, विलंब, परिश्रम एवं आयु का कारक।
सूर्य (कारक)
आत्मा, पिता, अधिकार एवं आत्मविश्वास का कारक।
बुध (कारक)
वाणी, विश्लेषण, व्यापार एवं अध्ययन का कारक।
D10 कुंडली
इस विषय की पुष्टि इसी वर्ग कुंडली में होती है।

लग्न के हिसाब से दशम भाव का स्वामी

मेष लग्न
मकर — स्वामी शनि
वृषभ लग्न
कुम्भ — स्वामी शनि
मिथुन लग्न
मीन — स्वामी गुरु
कर्क लग्न
मेष — स्वामी मंगल
सिंह लग्न
वृषभ — स्वामी शुक्र
कन्या लग्न
मिथुन — स्वामी बुध
तुला लग्न
कर्क — स्वामी चंद्र
वृश्चिक लग्न
सिंह — स्वामी सूर्य
धनु लग्न
कन्या — स्वामी बुध
मकर लग्न
तुला — स्वामी शुक्र
कुम्भ लग्न
वृश्चिक — स्वामी मंगल
मीन लग्न
धनु — स्वामी गुरु

इस पर कुछ करना हो तो

ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।

अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?

AI ज्योतिषी से पूछिए — वह आपकी अपनी कुंडली पढ़कर, सीधी भाषा में जवाब देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

करियर एवं व्यवसाय किस भाव से देखा जाता है?
करियर एवं व्यवसाय सबसे पहले दशम भाव से पढ़ा जाता है, जो कर्म, प्रतिष्ठा, अधिकार एवं सार्वजनिक भूमिका का है। कोई एक भाव इसे तय नहीं करता: षष्ठ भाव, एकादश भाव और द्वितीय भाव साथ में देखे जाते हैं, और कारक शनि, सूर्य और बुध पूरी कुंडली में जहाँ भी हों वहाँ से। भाव मजबूत और कारक कमजोर — या उल्टा — यही सामान्य स्थिति है। इसीलिए जिन दो लोगों का दशम भाव एक जैसा दिखता है, उनका भी यह अध्याय अलग निकलता है।
करियर एवं व्यवसाय का कारक ग्रह कौन है?
शनि, सूर्य और बुध — कारक, कुंडली में जहाँ भी हों वहीं से पढ़े जाते हैं।
फल कब मिलता है?
चार चीज़ें, इसी क्रम में: दशम भाव का स्वामी कहाँ गया और वहाँ किस दशा में है; भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं; बाहर से किसकी दृष्टि पड़ रही है; और शनि, सूर्य और बुध क्या कर रहे हैं। फिर D10 दूसरी राय की तरह देखी जाती है — जो भाव जन्म कुंडली में मजबूत हो पर अपनी वर्ग कुंडली में टूटा हो, वह फल नहीं देता; अच्छा दिखने वाला अध्याय कमजोर निकलने का यही सबसे आम कारण है। समय सबसे अंत में, दशा से: भाव अपना फल तब देता है जब उसका स्वामी या कारक चल रहा हो।

← 64 अध्याय