astropothi

D3 द्रेष्काण — भाई-बहन

D3 द्रेष्काण — भाई-बहन — यह वर्ग कुंडली किसलिए पढ़ी जाती है, विभाजन कैसे होता है, और जन्म समय इसे क्यों तय करता है।

1स्वयं2धन3भाई4घर5संतान6रोग7विवाह8आयु9भाग्य10कर्म11लाभ12व्ययलग्न यहाँ

इस चक्र को पढ़ना कैसे है

  • सबसे ऊपर बीच वाला हीरा हमेशा पहला भाव — लग्न — होता है।
  • वहाँ से भाव उल्टी दिशा (anticlockwise) में गिने जाते हैं: 1, 2, 3…
  • असली कुंडली में हर खाने में जो अंक लिखा होता है वह राशि का होता है, भाव का नहीं — भाव तो जगह से पता चलता है। इसीलिए छपी हुई कुंडली में अंक बेतरतीब लगते हैं।
  • चक्र का आकार कभी नहीं बदलता। सिर्फ़ राशियाँ और ग्रह बदलते हैं।

D3 भी बिल्कुल इसी आकार में बनता है। खाने वही रहते हैं — बस उनमें राशियाँ और ग्रह अलग बैठते हैं, क्योंकि हर राशि को 3 हिस्सों में बाँटकर दोबारा गिना जाता है।

यह किसलिए पढ़ी जाती है

D3 (द्रेष्काण) हर राशि को 3 भागों में बाँटकर उन्हीं भागों से पूरी कुंडली दोबारा बनाता है। इसे भाई-बहन और साहस के लिए पढ़ा जाता है। कोई ग्रह जन्म कुंडली में मजबूत दिख सकता है और यहाँ कमजोर — और यही इसका काम है: जन्म कुंडली वादा दिखाती है, वर्ग कुंडली बताती है कि वादा निभा या नहीं।

गणना कैसे होती है

हर 30° की राशि 3 बराबर भागों में कटती है, हर भाग 10.00° का, और हर भाग इस वर्ग के नियम से किसी राशि को मिलता है। आपके ग्रह का सटीक अंश तय करता है कि वह किस भाग में पड़ा — इसीलिए जन्म समय मायने रखता है: कुछ मिनट से ग्रह सीमा पार कर जाता है और पूरा D3 बदल जाता है।

इस पर कुछ करना हो तो

ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।

अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?

AI ज्योतिषी से पूछिए — वह आपकी अपनी कुंडली पढ़कर, सीधी भाषा में जवाब देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

D3 कुंडली किस काम आती है?
D3 (द्रेष्काण) हर राशि को 3 भागों में बाँटकर उन्हीं भागों से पूरी कुंडली दोबारा बनाता है। इसे भाई-बहन और साहस के लिए पढ़ा जाता है। कोई ग्रह जन्म कुंडली में मजबूत दिख सकता है और यहाँ कमजोर — और यही इसका काम है: जन्म कुंडली वादा दिखाती है, वर्ग कुंडली बताती है कि वादा निभा या नहीं।
D3 की गणना कैसे होती है?
हर 30° की राशि 3 बराबर भागों में कटती है, हर भाग 10.00° का, और हर भाग इस वर्ग के नियम से किसी राशि को मिलता है। आपके ग्रह का सटीक अंश तय करता है कि वह किस भाग में पड़ा — इसीलिए जन्म समय मायने रखता है: कुछ मिनट से ग्रह सीमा पार कर जाता है और पूरा D3 बदल जाता है।

64 अध्याय