धन योग
अंतिम अपडेट
धन योग — ये योग किस स्वामित्व-नियम से बनते हैं, और आपकी कुंडली में कौन-से भावेश इन्हें बनाते हैं।
0नियम
धनयोग कमाई वाले भावों के स्वामियों के बीच बनता है — दूसरा, जो संचय है, और ग्यारहवाँ, जो आय है — और पहले, पाँचवें या नवें के स्वामी के साथ।
यह तय क्या करता है
दूसरा और ग्यारहवाँ अकेले केवल यह बताते हैं कि धन आ-जा रहा है। उसमें से कुछ टिकेगा या नहीं, यह त्रिकोणेश के जुड़ने से तय होता है। उसी योग में बारहवें का स्वामी उसे खर्च कराता है, छठे का उधार। दोनों योग को रद्द नहीं करते — वे बताते हैं कि आया हुआ धन जाता कहाँ है।
लग्न के हिसाब से कौन-से स्वामी
- मेष लग्न
- शुक्र और शनि के साथ मंगल, सूर्य और गुरु
- वृषभ लग्न
- बुध और गुरु के साथ शुक्र, बुध और शनि
- मिथुन लग्न
- चंद्र और मंगल के साथ बुध, शुक्र और शनि
- कर्क लग्न
- सूर्य और शुक्र के साथ चंद्र, मंगल और गुरु
- सिंह लग्न
- बुध के साथ सूर्य, गुरु और मंगल
- कन्या लग्न
- शुक्र और चंद्र के साथ बुध, शनि और शुक्र
- तुला लग्न
- मंगल और सूर्य के साथ शुक्र, शनि और बुध
- वृश्चिक लग्न
- गुरु और बुध के साथ मंगल, गुरु और चंद्र
- धनु लग्न
- शनि और शुक्र के साथ गुरु, मंगल और सूर्य
- मकर लग्न
- शनि और मंगल के साथ शनि, शुक्र और बुध
- कुम्भ लग्न
- गुरु के साथ शनि, बुध और शुक्र
- मीन लग्न
- मंगल और शनि के साथ गुरु, चंद्र और मंगल
इस पर कुछ करना हो तो
ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।
अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?
AI ज्योतिषी से पूछिए — वह आपकी अपनी कुंडली पढ़कर, सीधी भाषा में जवाब देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- धनयोग कैसे बनता है?
- धनयोग कमाई वाले भावों के स्वामियों के बीच बनता है — दूसरा, जो संचय है, और ग्यारहवाँ, जो आय है — और पहले, पाँचवें या नवें के स्वामी के साथ।
- योग होने भर से फल मिल जाता है?
- नहीं। योग इतना कहता है कि संयोग बना है; फल मिलेगा या नहीं यह दोनों स्वामियों के बल पर और उनमें से किसी एक की दशा चलने पर निर्भर है। दो कमजोर स्वामियों का बिना दृष्टि वाला योग, ऐसे दौर में जो उनमें से किसी का नहीं — वह रिपोर्ट की एक पंक्ति भर है।
