स्वास्थ्य एवं आयु

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कुंडली में स्वास्थ्य एवं आयु — किन भावों से पढ़ा जाता है, कौन-से ग्रह इसके कारक हैं, और कौन-सी वर्ग कुंडली इसकी पुष्टि करती है।

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यह किन भावों से पढ़ा जाता है

स्वास्थ्य एवं आयु सबसे पहले षष्ठ भाव से पढ़ा जाता है, जो रोग, ऋण, प्रतिस्पर्धा एवं दैनिक सेवा का है। कोई एक भाव इसे तय नहीं करता: अष्टम भाव और द्वादश भाव साथ में देखे जाते हैं, और कारक शनि और सूर्य पूरी कुंडली में जहाँ भी हों वहाँ से। भाव मजबूत और कारक कमजोर — या उल्टा — यही सामान्य स्थिति है। इसीलिए जिन दो लोगों का षष्ठ भाव एक जैसा दिखता है, उनका भी यह अध्याय अलग निकलता है।

कैसे तय होता है

चार चीज़ें, इसी क्रम में: षष्ठ भाव का स्वामी कहाँ गया और वहाँ किस दशा में है; भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं; बाहर से किसकी दृष्टि पड़ रही है; और शनि और सूर्य क्या कर रहे हैं। फिर D30 दूसरी राय की तरह देखी जाती है — जो भाव जन्म कुंडली में मजबूत हो पर अपनी वर्ग कुंडली में टूटा हो, वह फल नहीं देता; अच्छा दिखने वाला अध्याय कमजोर निकलने का यही सबसे आम कारण है। समय सबसे अंत में, दशा से: भाव अपना फल तब देता है जब उसका स्वामी या कारक चल रहा हो।

क्या-क्या देखा जाता है

षष्ठ भाव
मुख्य भाव — रोग, ऋण, प्रतिस्पर्धा एवं दैनिक सेवा।
अष्टम भाव
साथ में — आयु, आकस्मिक परिवर्तन, उत्तराधिकार एवं गुप्त विषय।
द्वादश भाव
साथ में — व्यय, विदेश, निद्रा एवं त्याग।
शनि (कारक)
अनुशासन, विलंब, परिश्रम एवं आयु का कारक।
सूर्य (कारक)
आत्मा, पिता, अधिकार एवं आत्मविश्वास का कारक।
D30 कुंडली
इस विषय की पुष्टि इसी वर्ग कुंडली में होती है।

लग्न के हिसाब से षष्ठ भाव का स्वामी

मेष लग्न
कन्या — स्वामी बुध
वृषभ लग्न
तुला — स्वामी शुक्र
मिथुन लग्न
वृश्चिक — स्वामी मंगल
कर्क लग्न
धनु — स्वामी गुरु
सिंह लग्न
मकर — स्वामी शनि
कन्या लग्न
कुम्भ — स्वामी शनि
तुला लग्न
मीन — स्वामी गुरु
वृश्चिक लग्न
मेष — स्वामी मंगल
धनु लग्न
वृषभ — स्वामी शुक्र
मकर लग्न
मिथुन — स्वामी बुध
कुम्भ लग्न
कर्क — स्वामी चंद्र
मीन लग्न
सिंह — स्वामी सूर्य

इस पर कुछ करना हो तो

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्वास्थ्य एवं आयु किस भाव से देखा जाता है?
स्वास्थ्य एवं आयु सबसे पहले षष्ठ भाव से पढ़ा जाता है, जो रोग, ऋण, प्रतिस्पर्धा एवं दैनिक सेवा का है। कोई एक भाव इसे तय नहीं करता: अष्टम भाव और द्वादश भाव साथ में देखे जाते हैं, और कारक शनि और सूर्य पूरी कुंडली में जहाँ भी हों वहाँ से। भाव मजबूत और कारक कमजोर — या उल्टा — यही सामान्य स्थिति है। इसीलिए जिन दो लोगों का षष्ठ भाव एक जैसा दिखता है, उनका भी यह अध्याय अलग निकलता है।
स्वास्थ्य एवं आयु का कारक ग्रह कौन है?
शनि और सूर्य — कारक, कुंडली में जहाँ भी हों वहीं से पढ़े जाते हैं।
फल कब मिलता है?
चार चीज़ें, इसी क्रम में: षष्ठ भाव का स्वामी कहाँ गया और वहाँ किस दशा में है; भाव में कौन-से ग्रह बैठे हैं; बाहर से किसकी दृष्टि पड़ रही है; और शनि और सूर्य क्या कर रहे हैं। फिर D30 दूसरी राय की तरह देखी जाती है — जो भाव जन्म कुंडली में मजबूत हो पर अपनी वर्ग कुंडली में टूटा हो, वह फल नहीं देता; अच्छा दिखने वाला अध्याय कमजोर निकलने का यही सबसे आम कारण है। समय सबसे अंत में, दशा से: भाव अपना फल तब देता है जब उसका स्वामी या कारक चल रहा हो।

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