उपाय

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कुंडली के उपाय — किस ग्रह के लिए क्या, किस वार को, और क्यों शिकायत नहीं बल्कि कुंडली तय करती है।

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उपाय किसलिए है

उपाय किसी ग्रह को बल देता है, और किस ग्रह को बल चाहिए — यह सवाल आपकी कुंडली का है, आपकी समस्या का नहीं। एक ही शिकायत वाले दो लोगों — नौकरी नहीं है — को उल्टे उपाय चाहिए हो सकते हैं, क्योंकि एक की कुंडली में दशमेश कमजोर है और दूसरे की में छठे का स्वामी कुछ ज़्यादा ही मजबूत। शिकायतों की सूची से उठाया गया उपाय प्रायः कुछ नहीं करता, इसका कारण भी यही है।

हर ग्रह का वार, रत्न और मंत्र

सूर्य
रविवार · माणिक · ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
चंद्र
सोमवार · मोती · ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः
मंगल
मंगलवार · मूंगा · ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
बुध
बुधवार · पन्ना · ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
गुरु
गुरुवार · पुखराज · ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
शुक्र
शुक्रवार · हीरा · ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शनि
शनिवार · नीलम · ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
राहु
शनिवार · गोमेद · ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
केतु
मंगलवार · लहसुनिया · ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

रत्न धारण करने से पहले

रत्न उस ग्रह को बढ़ाता है जो पहले से जो कर रहा है — इसीलिए यह इकलौता उपाय है जो नुक़सान भी कर सकता है। जो ग्रह आपके लग्न से छठे, आठवें या बारहवें का स्वामी हो, उसका रत्न उन भावों को भी बल दे देता है। मंत्र और वार-दान में यह ख़तरा नहीं है, और शास्त्र वहीं से शुरू करते हैं।

इस पर कुछ करना हो तो

ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।

अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?

AI ज्योतिषी से पूछिए — वह आपकी अपनी कुंडली पढ़कर, सीधी भाषा में जवाब देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कौन-सा रत्न किस ग्रह का है?
सूर्य — माणिक, चंद्र — मोती, मंगल — मूंगा, बुध — पन्ना, गुरु — पुखराज, शुक्र — हीरा, शनि — नीलम, राहु — गोमेद, केतु — लहसुनिया
क्या रत्न नुक़सान कर सकता है?
हाँ। यह ग्रह को बढ़ाता है, इसलिए जिस ग्रह के अधीन आपकी कुंडली में कठिन भाव हों, उसका रत्न उन्हें भी बल देता है। मंत्र या वार-दान में यह ख़तरा नहीं।

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