अहोई अष्टमी कब है?

उत्तर

सोमवार, 02 नवम्बर 2026

माताओं का संतान हेतु व्रत।

उसी दिन क्यों

यह कौन-सी तिथि है
कार्तिक कृष्ण 8

सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।

उसके बाद

  • शनिवार, 23 अक्टूबर 2027

    कार्तिक कृष्ण 8

  • बुधवार, 11 अक्टूबर 2028

    कार्तिक कृष्ण 8

यह तिथि कैसे निकली

त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।

उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।

क्यों मनाई जाती है

कार्तिक कृष्ण अष्टमी — माँओं का व्रत, संतान के लिए। करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद आता है, और नियम भी वैसा ही है: निर्जला व्रत, और पारण तारे देखकर, न कि चाँद देखकर। यही इसका अपना नियम है — अहोई का व्रत तारों से खुलता है, इसलिए यह करवा चौथ से जल्दी पूरा हो जाता है। कुछ घरों में जिनकी संतान की मनोकामना है वे भी रखते हैं। ‘अहोई’ का अर्थ है ‘अनहोनी को होनी से बचाने वाली’।

कथा

साहूकारनी और खुरपी

एक साहूकार की पत्नी दिवाली से पहले घर लीपने के लिए मिट्टी खोदने गई। खुरपी चलाते समय उससे स्याहू (साही) का बच्चा मर गया।

श्राप

स्याहू माता ने कहा — तूने मेरी संतान मारी है, अब तेरी कोख बंधेगी। उस दिन से उसके बच्चे नहीं बचते थे।

पश्चाताप

वर्षों बाद उसने अपनी भूल मानी और स्याहू माता को ढूँढ़ने निकली। रास्ते में उसने एक सुरही गाय की सेवा की।

गरुड़ पंखनी

गाय और गरुड़ पंखनी उसे स्याहू माता तक ले गईं — और रास्ते में उसने साँप के बच्चों को गरुड़ से बचाया।

वरदान

स्याहू माता ने प्रसन्न होकर कोख खोल दी। जो अष्टमी उसने माँगी थी वही कार्तिक कृष्ण अष्टमी है, और तब से माँएँ यह व्रत रखती हैं।

सामग्री

  • अहोई माता का चित्र या दीवार पर बनी आकृति — साथ में स्याहू और उसके सात बच्चे
  • चाँदी की अहोई (स्याहू) — कुछ घरों में हर संतान पर एक मनका जोड़ा जाता है
  • कलश में जल, और करवा
  • आठ पूरी, आठ पुए और हलवा
  • सिंघाड़े, मूली और मौसमी फल
  • कच्चा दूध, चावल, रोली
  • मोती या चाँदी की माला, जिसमें हर वर्ष एक मनका जुड़ता है
  • दीपक और धूप

पूजा विधि

  1. 1

    संकल्प

    सूर्योदय से पहले सरगी या जल लेकर व्रत का संकल्प — संतान की लंबी आयु के लिए। फिर दिन भर निर्जल।

  2. 2

    अहोई बनाना

    दीवार पर गेरू से अहोई माता और स्याहू के सात बच्चों की आकृति बनाएँ, या छपा हुआ चित्र लगाएँ।

  3. 3

    संध्या पूजन

    सूर्यास्त के बाद चौकी पर जल का कलश, अहोई का चित्र, चाँदी की माला। रोली-अक्षत, दूध-चावल का भोग, आठ पूरी और हलवा।

  4. 4

    कथा

    साहूकारनी और स्याहू माता की कथा सुनें, हाथ में सात दाने गेहूँ लेकर।

  5. 5

    तारों को अर्घ्य

    तारे दिखने पर करवे से तारों को जल का अर्घ्य दें। यही पारण का संकेत है — चाँद का इंतज़ार नहीं।

  6. 6

    पारण

    सास या घर की बड़ी स्त्री के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें, फिर व्रत खोलें।

क्या करें

  • पारण तारे देखकर करें, चाँद देखकर नहीं। अहोई में चंद्रोदय का इंतज़ार करने की परंपरा नहीं है — कई घर करवा चौथ समझकर देर तक भूखे रहते हैं।
  • चाँदी की अहोई माला में हर संतान के जन्म पर एक मनका जोड़ें; यही उस माला का अर्थ है।
  • स्याहू के सात बच्चे चित्र में ज़रूर हों — कथा उन्हीं की है।
  • व्रत माँ रखती है; बच्चों को व्रत नहीं रखना होता।
  • कथा सुनते समय हाथ में सात गेहूँ के दाने रखें और बाद में उन्हें संभालकर रखें।

क्या न करें

  • आज मिट्टी न खोदें और ज़मीन की खुदाई का काम न करें — कथा का मूल यही है।
  • व्रत के दिन किसी जीव को कष्ट न पहुँचाएँ; यह व्रत ही एक जीव की मृत्यु से शुरू होता है।
  • पारण से पहले जल भी नहीं — यह निर्जला व्रत है।
  • अहोई का चित्र दिवाली तक दीवार से न हटाएँ; परंपरा में इसे दिवाली के बाद ही हटाते हैं।
  • नुकीली चीज़ों — कैंची, सुई, चाकू — का काम आज टाल दें।

आरती

अहोई माता की आरती

जय अहोई माता, जय अहोई माता।

तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥

ब्रह्माणी रुद्राणी कमला, तू ही है जगमाता।

सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

माता रूप निरंजन, सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पाता॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।

कर्म प्रभाव प्रकाशक, जगनिधि से त्राता॥

जिस घर थारो वासा, वाहि में गुण आता।

कर न सके सोई कर ले, मन नहीं घबराता॥

तुम बिन सुख न होवे, न कोई पुत्र पाता।

खान पान का वैभव, तुम बिन नहीं आता॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता, क्षीर निधि जाता।

रतन चतुर्दश तोकू, कोई नहीं पाता॥

श्री अहोई माँ की आरती, जो कोई नर गाता।

उर उमंग अति उपजे, पाप उतर जाता॥

आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।

वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।

कहीं अटक गए, या कुछ ठीक नहीं लग रहा?

हर संदेश एक इंसान पढ़ता है — कोई बॉट नहीं। अपनी कुंडली, रिपोर्ट, भुगतान या ऑर्डर — किसी भी बारे में पूछिए। सुबह 9 से रात 9, रोज़।