अनंत चतुर्दशी कब है?

उत्तर

शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026

अनंत व्रत। गणेश के दस दिन यहीं पूरे होते हैं।

उसी दिन क्यों

यह कौन-सी तिथि है
भाद्रपद शुक्ल 14

सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।

उसके बाद

  • मंगलवार, 14 सितम्बर 2027

    भाद्रपद शुक्ल 14

  • शनिवार, 02 सितम्बर 2028

    भाद्रपद शुक्ल 14

यह तिथि कैसे निकली

त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।

उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।

क्यों मनाई जाती है

अनंत चतुर्दशी विष्णु के अनंत रूप का व्रत है — वह रूप जिसका न आदि है न अंत। कथा महाभारत से आती है: वनवास में युधिष्ठिर ने कृष्ण से पूछा कि खोया राज्य कैसे लौटे, और कृष्ण ने यही व्रत बताया। इसी दिन गणेश जी का विसर्जन भी होता है, क्योंकि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से गिने दस दिन यहीं पूरे होते हैं।

कथा

सुशीला का व्रत

सुमंत की बेटी सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से हुआ। ससुराल जाते समय उसने नदी किनारे स्त्रियों को अनंत व्रत करते देखा, विधि पूछी, और चौदह गाँठ का डोरा बाँध लिया।

समृद्धि

उस दिन के बाद कौंडिन्य का घर धन-धान्य से भर गया। ऋषि को लगा यह सब उनकी अपनी तपस्या का फल है।

डोरा तोड़ना

एक दिन उन्होंने सुशीला की बाँह पर वह डोरा देखा, पूछा यह क्या है, और उत्तर सुनकर क्रोध में उसे तोड़कर आग में डाल दिया — मेरी तपस्या के आगे यह क्या है।

सब चला जाना

उसी दिन से सब जाने लगा। धन गया, धान गया, घर उजड़ गया। तब ऋषि को समझ आया कि उन्होंने क्या तोड़ा है।

चौदह वर्ष

कौंडिन्य वन-वन भटके, अनंत को ढूँढते हुए। अंत में विष्णु मिले और कहा — चौदह वर्ष यह व्रत करो। उन्होंने किया, और सब लौट आया।

सामग्री

  • चौदह गाँठ का अनंत सूत्र — रेशम या कच्चा सूत, हल्दी में रँगा
  • विष्णु या शेषशायी की प्रतिमा अथवा चित्र
  • कलश, नारियल और आम के पत्ते
  • पीले फूल और पीला वस्त्र
  • चौदह पूड़ी और चौदह गुड़-आटे के मीठे टुकड़े
  • पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
  • धूप, दीप, कपूर, चंदन, अक्षत
  • केला, नारियल और मौसमी फल
  • दर्भ (कुश) — शेषनाग के प्रतीक के लिए

पूजा विधि

  1. 1

    स्नान और संकल्प

    प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र पहनें। चौदह वर्ष तक व्रत करने का संकल्प लिया जाता है — पहली बार करने वाले यही गिनती शुरू करते हैं।

  2. 2

    कलश और शेष

    चौकी पर पीला वस्त्र, उस पर कलश। कुश से शेषनाग की कुंडली बनाकर उस पर विष्णु की प्रतिमा रखें।

  3. 3

    अनंत सूत्र की पूजा

    चौदह गाँठ वाला सूत्र सामने रखकर उसकी पूजा करें — चंदन, अक्षत, पीले फूल। चौदह गाँठें चौदह लोकों की हैं।

  4. 4

    षोडशोपचार

    विष्णु की सोलह उपचारों से पूजा, फिर चौदह पूड़ी और चौदह मीठे टुकड़ों का भोग।

  5. 5

    सूत्र बाँधना

    पुरुष दाहिनी बाँह पर, स्त्रियाँ बाईं पर बाँधें। बाँधते समय — अनंत संसार महासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव।

  6. 6

    कथा और आरती

    कौंडिन्य और सुशीला की कथा सुनें, फिर आरती। पिछले वर्ष का सूत्र आज ही उतारकर जल में प्रवाहित करें।

क्या करें

  • सूत्र चौदह गाँठ का ही हो — गिनकर बाँधें। चौदह लोक, चौदह वर्ष, चौदह गाँठ।
  • पिछले वर्ष का सूत्र आज ही उतारें और जल में प्रवाहित करें, कूड़े में नहीं।
  • व्रत की गिनती रखें। जिस वर्ष शुरू किया, चौदह वर्ष पूरे करने का संकल्प है — बीच में छोड़ने की परंपरा नहीं।
  • गणेश विसर्जन इसी दिन है, तो दोनों की तैयारी साथ रखें — विसर्जन दोपहर बाद ही करें।

क्या न करें

  • सूत्र को धागा समझकर न फेंकें और न किसी को दें। कथा का पूरा मोड़ इसी पर है — कौंडिन्य ने उसे तोड़ा और सब चला गया।
  • व्रत के दिन नमक वाला अन्न न लें — फलाहार या एक समय सात्विक भोजन।
  • चौदह से कम या ज़्यादा गाँठ न बाँधें।
  • काले वस्त्र न पहनें; इस व्रत का रंग पीला है।

आरती

ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।

तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।

वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।

कहीं अटक गए, या कुछ ठीक नहीं लग रहा?

हर संदेश एक इंसान पढ़ता है — कोई बॉट नहीं। अपनी कुंडली, रिपोर्ट, भुगतान या ऑर्डर — किसी भी बारे में पूछिए। सुबह 9 से रात 9, रोज़।