भाई दूज कब है?
उत्तर
बुधवार, 11 नवम्बर 2026
शुक्ल पक्ष की द्वितीया।
उसी दिन क्यों
- यह कौन-सी तिथि है
- कार्तिक शुक्ल 2
सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।
उसके बाद
रविवार, 31 अक्टूबर 2027
कार्तिक शुक्ल 2
गुरुवार, 19 अक्टूबर 2028
कार्तिक शुक्ल 2
यह तिथि कैसे निकली
त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।
उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।
क्यों मनाई जाती है
कार्तिक शुक्ल द्वितीया — दिवाली के दो दिन बाद। यह इकलौता त्योहार है जिसमें बहन भाई को अपने घर बुलाती है, न कि भाई बहन को कुछ देने जाता है — रक्षाबंधन से यही फ़र्क़ है। कारण कथा में है: यमुना ने बरसों बाद अपने भाई यम को भोजन पर बुलाया, और यम ने प्रसन्न होकर वर दिया कि आज के दिन जो भाई बहन के घर भोजन करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसीलिए इसका दूसरा नाम यम द्वितीया है, और इसी से यह भी निकला कि आज बहन के हाथ का भोजन ही करना है।
कथा
बहन का बुलावा
यमुना बार-बार अपने भाई यम को भोजन पर बुलाती रहीं, पर वे व्यस्त रहते और आ न पाते।
आना
एक दिन — कार्तिक शुक्ल द्वितीया — यम आ गए। यमुना ने तिलक किया, आरती उतारी और अपने हाथ से भोजन कराया।
वरदान
यम ने कहा — माँगो। यमुना ने कहा: वर यह दो कि आज के दिन जो भाई बहन के घर जाकर तिलक कराए और भोजन करे, उसे तुम्हारा भय न रहे।
यम द्वितीया
यम ने वही वर दिया। इसीलिए दिन का नाम यम द्वितीया है और यमुना में स्नान का महत्व इसी से है।
दूसरी कथा
एक और कथा में नरकासुर वध के बाद कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास पहुँचे; उन्होंने तिलक कर आरती उतारी और मिठाई खिलाई — वही परंपरा चली।
सामग्री
- रोली, चावल, दही और सिंदूर — तिलक के लिए
- आरती की थाली, दीपक और कपूर
- नारियल — बहन भाई को देती है
- कलावा या मौली
- मिठाई, विशेषकर बहन के हाथ की बनी
- बताशे और सूखा नारियल (गोला)
- भाई के लिए भेंट और बहन के लिए उपहार
- सिंघाड़े और मौसमी फल
पूजा विधि
1
स्नान
बहन और भाई दोनों प्रातः स्नान करें। जो यमुना के पास हों वे यमुना में स्नान करते हैं — कथा का सीधा हिस्सा है।
2
यम-यमुना पूजन
पूजा से पहले यम, यमुना और चित्रगुप्त का स्मरण किया जाता है। कुछ घरों में बहन पहले यम के नाम दीप जलाती है।
3
आसन
भाई को चौकी पर बैठाएँ, आसन पर चावल से चौक बनाकर। मुँह उत्तर या उत्तर-पश्चिम की ओर।
4
तिलक
बहन रोली, चावल और दही से तिलक करे, फिर कलावा बाँधे, आरती उतारे और नारियल दे।
5
भोजन
बहन अपने हाथ से भोजन कराए। यही वह क्रिया है जिस पर पूरा वरदान टिका है — मिठाई भर से काम नहीं चलता।
6
भेंट
भाई बहन को उपहार और आशीर्वाद दे। जिनकी बहन न हो वे चचेरी-ममेरी बहन या नदी को बहन मानकर यह करते हैं।
क्या करें
- भाई बहन के घर जाकर भोजन करे — यही दिन का नियम है। बहन का भाई के घर जाना इस त्योहार की परंपरा नहीं।
- तिलक के समय भाई का मुँह उत्तर या उत्तर-पश्चिम की ओर रखें।
- बहन अपने हाथ से बना भोजन कराए; वर इसी पर है।
- जिनकी सगी बहन नहीं, वे चचेरी-ममेरी बहन या यमुना/नदी को बहन मानकर यह कर सकते हैं — परंपरा में इसकी छूट है।
- तिलक शुभ मुहूर्त में — अधिकतर पंचांग दोपहर का समय देते हैं।
क्या न करें
- तिलक से पहले भाई कुछ न खाए।
- आज भाई-बहन में कटु वचन या झगड़ा न हो — दिन का पूरा अर्थ ही यही है।
- भाई ख़ाली हाथ न लौटे और बहन को दी भेंट टालकर बाद में न दे।
- काले वस्त्र पहनकर तिलक न कराएँ।
- बहन का दिया नारियल फेंके नहीं — घर में रखें।
आरती
श्री यमुना जी की आरती
ॐ जय यमुना माता, मैया जय यमुना माता।
धर्मराज की भगिनी, सूर्य पुत्री ख्याता॥
कालिंदी के कूल पर, कृष्ण रास रचायो।
नंदनंदन को पावन, तट पर नित पायो॥
यम ने तोहि वर दीनो, भ्रात-भगिनी हेतु।
जो नर तिलक कराए, ताहि न यम भय हेतु॥
श्याम रंग तव जल है, पाप विनाशन हारी।
जो जन तुझमें न्हाए, ताहि मुक्ति भारी॥
श्री यमुना जी की आरती, जो कोई नर गावे।
भ्रात-भगिनी का नाता, जनम-जनम निभावे॥
आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।
वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।
