गुड़ी पड़वा / उगादि कब है?
उत्तर
बुधवार, 07 अप्रैल 2027
चांद्र नववर्ष। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।
उसी दिन क्यों
- यह कौन-सी तिथि है
- चैत्र शुक्ल 1
सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।
उसके बाद
सोमवार, 27 मार्च 2028
चैत्र शुक्ल 1
शुक्रवार, 16 मार्च 2029
चैत्र शुक्ल 1
यह तिथि कैसे निकली
त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।
उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।
क्यों मनाई जाती है
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — हिंदू नववर्ष का पहला दिन। विक्रम संवत यहीं से बदलता है, और यही कारण है कि इसे अलग-अलग प्रदेशों में अलग नाम मिले: महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक और आंध्र में उगादि, कश्मीर में नवरेह, सिंधियों में चेटी चंड। ब्रह्म पुराण कहता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि इसी दिन आरंभ की थी। गुड़ी — बाँस पर उलटा कलश, रेशमी वस्त्र और नीम-आम के पत्ते — विजय का ध्वज है; कहा जाता है कि शालिवाहन की जीत पर लोगों ने यही ध्वज घर-घर खड़ा किया था। यह भी वर्ष के साढ़े तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है।
कथा
सृष्टि का आरंभ
ब्रह्म पुराण के अनुसार प्रलय के बाद ब्रह्मा ने इसी तिथि से समय की गिनती फिर शुरू की। इसीलिए यह संवत्सर का पहला दिन है।
राम का लौटना
एक परंपरा कहती है कि रावण वध के बाद राम इसी दिन अयोध्या पहुँचे और नगर ने विजय ध्वज लगाए — गुड़ी उसी ध्वज की स्मृति है।
शालिवाहन
दूसरी कथा शालिवाहन की है, जिसने मिट्टी की सेना में प्राण डालकर शकों को हराया। उसकी जीत से शालिवाहन शक संवत शुरू हुआ और लोगों ने घर-घर गुड़ी खड़ी की।
नीम और गुड़
आज की पहली चीज़ जो खाई जाती है वह नीम और गुड़ का मिश्रण है — कड़वा और मीठा साथ। वर्ष का पहला दिन यही कहकर शुरू होता है कि दोनों आएँगे।
सामग्री
- बाँस की लंबी छड़ी और उस पर चढ़ाने के लिए नया रेशमी वस्त्र (हरा या पीला)
- ताँबे या चाँदी का कलश — उलटा चढ़ाने के लिए
- नीम की पत्तियाँ, आम के पत्ते और गेंदे की माला
- बताशे या साखर गाठी (चीनी की माला)
- नीम, गुड़, इमली और कच्चा आम — नववर्ष की पहली भेंट के लिए
- रंगोली और हल्दी-कुमकुम
- पूरन पोली या श्रीखंड
- नया पंचांग — वर्ष का पहला पाठ इसी से होता है
पूजा विधि
1
अभ्यंग स्नान
सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान — महाराष्ट्र में इसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। फिर नए वस्त्र।
2
गुड़ी खड़ी करना
सूर्योदय के बाद पहले घंटे में। बाँस पर रेशमी वस्त्र, नीम-आम के पत्ते, फूलों की माला और साखर गाठी बाँधकर उस पर उलटा कलश। गुड़ी घर के दाहिनी ओर, खिड़की या द्वार पर खड़ी करें।
3
पूजन
गुड़ी पर हल्दी-कुमकुम, फूल और धूप। ब्रह्मा और विष्णु का स्मरण, फिर आरती।
4
नीम-गुड़
पूजा के बाद नीम, गुड़, इमली और कच्चे आम का मिश्रण सबको दें — वर्ष का पहला स्वाद।
5
पंचांग श्रवण
नया पंचांग खोलकर वर्ष का फल सुनना — इसी दिन की परंपरा है।
6
उतारना
सूर्यास्त से पहले गुड़ी उतार लें। दिन ढलने के बाद उसे खड़ा नहीं छोड़ते।
क्या करें
- गुड़ी सूर्योदय के बाद खड़ी करें और सूर्यास्त से पहले उतार लें — रात भर खड़ी नहीं रहती।
- कलश उलटा ही चढ़ाएँ; सीधा कलश गुड़ी नहीं होती।
- नीम-गुड़ का मिश्रण सबसे पहले खाएँ, ख़ाली पेट।
- यह अबूझ मुहूर्त है — नया काम, नया वाहन, सोना ख़रीदना, गृहप्रवेश आज बिना मुहूर्त देखे कर सकते हैं।
- नया पंचांग आज ही लें और वर्ष का फल पढ़ें/सुनें।
- द्वार पर आम के पत्तों का तोरण और रंगोली ज़रूर बनाएँ।
क्या न करें
- गुड़ी को अशुद्ध या पुराने कपड़े से न सजाएँ; वस्त्र नया होना चाहिए।
- गुड़ी को रात में खड़ी न छोड़ें और गिरने न दें — गिरना अशुभ माना जाता है।
- आज घर में कलह न हो; वर्ष के पहले दिन की परंपरा इसी पर टिकी है।
- नीम-गुड़ में केवल मीठा न लें — कड़वा हिस्सा ही इस रिवाज़ का अर्थ है।
- आज माँस-मदिरा और तामसिक भोजन नहीं।
आरती
ॐ जय ब्रह्मदेव हरे
ॐ जय ब्रह्मदेव हरे, स्वामी जय ब्रह्मदेव हरे।
सृष्टि रचयिता तुम हो, काल चक्र धरे॥
चार वेद मुख से प्रकटे, कमल आसन धारी।
हंस वाहन शोभित, सावित्री प्यारी॥
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, सृष्टि तुमने रची।
काल गणना आरंभी, संवत तुमने दी॥
नववर्ष का पहला दिन, तुमको समर्पित है।
नीम गुड़ का भोग लो, भक्ति अर्पित है॥
श्री ब्रह्मदेव की आरती, जो कोई नर गावे।
नूतन वर्ष सुहावन, मंगलमय पावे॥
आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।
वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।
