माघ पूर्णिमा कब है?
उत्तर
शनिवार, 20 फ़रवरी 2027
माघ की पूर्णिमा।
उसी दिन क्यों
- यह कौन-सी तिथि है
- माघ शुक्ल पूर्णिमा
सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।
उसके बाद
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2028
माघ शुक्ल पूर्णिमा
मंगलवार, 30 जनवरी 2029
माघ शुक्ल पूर्णिमा
यह तिथि कैसे निकली
त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।
उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।
क्यों मनाई जाती है
माघ की पूर्णिमा — कल्पवास का अंतिम दिन। पूरे माघ महीने जो लोग संगम के किनारे तंबू में रहकर व्रत, स्नान और सत्संग करते हैं, उनका एक महीने का संकल्प आज पूरा होता है। मान्यता है कि आज विष्णु स्वयं गंगाजल में वास करते हैं, और देवता मनुष्य रूप में संगम पर स्नान करने आते हैं — इसीलिए आज किसी को लौटाया नहीं जाता। ज्योतिष में यह वह पूर्णिमा है जिसमें चंद्रमा प्रायः मघा नक्षत्र के आसपास होता है, और महीने का नाम भी वहीं से है।
कथा
धनेश्वर ब्राह्मण
कांतिका नगरी में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण था, जिसकी कोई संतान न थी। वह और उसकी पत्नी दान माँगते तो लोग निःसंतान कहकर लौटा देते।
काम्यकवन
दुःख में दोनों काम्यकवन गए और वहाँ ऋषियों से उपाय पूछा।
माघ स्नान
ऋषियों ने कहा — माघ भर प्रतिदिन प्रातः स्नान करो, संयम रखो, और पूर्णिमा को दान करो।
फल
दोनों ने पूरा माघ स्नान किया। पूर्णिमा को दान के बाद उन्हें पुत्र हुआ।
कल्पवास
उसी परंपरा से माघ भर संगम पर रहने का नियम बना, जिसे कल्पवास कहते हैं — और उसका समापन इसी पूर्णिमा को होता है।
सामग्री
- गंगाजल और काले तिल — स्नान के जल में
- तिल के लड्डू, गुड़ और कंबल — दान के लिए
- विष्णु या सत्यनारायण का चित्र, तुलसी दल
- पंचामृत और पंजीरी (सत्यनारायण कथा का प्रसाद)
- केले के पत्ते, आम के पत्ते, कलश
- घी का दीपक और कपूर
- पीले वस्त्र और पीले फूल
- अन्न और वस्त्र — दान के लिए
पूजा विधि
1
स्नान
ब्रह्म मुहूर्त में संगम, गंगा या किसी नदी में। घर पर हो तो जल में गंगाजल और तिल डालें। स्नान से पहले संकल्प लें।
2
सूर्य अर्घ्य
स्नान के बाद ताँबे के लोटे से सूर्य को जल, उसमें तिल और लाल फूल।
3
सत्यनारायण कथा
पूर्णिमा सत्यनारायण कथा का निश्चित दिन है। कलश स्थापना, पंचामृत, तुलसी दल, और कथा के पाँच अध्याय — फिर पंजीरी का प्रसाद।
4
पितरों का स्मरण
जिनके पितरों की तिथि माघ में हो, वे आज तर्पण करते हैं। तिल मिला जल, दक्षिण की ओर मुँह।
5
दान
तिल, गुड़, कंबल, अन्न और वस्त्र। कल्पवास करने वाले आज अपना पूरा सामान — तंबू, बिस्तर, बर्तन — दान कर देते हैं।
6
व्रत का पारण
दान के बाद ही भोजन। जो पूरे माघ का संकल्प लिए थे, उनका संकल्प आज पूरा होता है।
क्या करें
- स्नान से पहले संकल्प लें और स्नान के जल में तिल डालें — माघ स्नान का यह अंतिम और सबसे बड़ा दिन है।
- सत्यनारायण कथा के लिए यही सबसे उपयुक्त दिन है; पूर्णिमा उसका निश्चित दिन माना गया है।
- दान भोजन से पहले करें, बाद में नहीं।
- कल्पवास कर रहे हों तो अपना उपयोग किया सामान दान कर दें — यही उसकी परंपरा है।
- आज किसी माँगने वाले को ख़ाली न लौटाएँ; मान्यता है देवता मनुष्य रूप में आते हैं।
क्या न करें
- आज माँस, मदिरा और तामसिक भोजन नहीं।
- पूर्णिमा के दिन बाल-नाखून न कटवाएँ।
- किसी से कटु वचन या विवाद नहीं — पूर्णिमा व्रत का यही मूल नियम है।
- दान लेकर नहीं, देकर दिन पूरा करें।
- स्नान के जल में साबुन-तेल लगाकर नदी में न उतरें।
आरती
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।
वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।
