राम नवमी कब है?
उत्तर
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
श्रीराम का जन्म, शुक्ल पक्ष की नवमी।
उसी दिन क्यों
- यह कौन-सी तिथि है
- चैत्र शुक्ल 9
सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।
उसके बाद
मंगलवार, 04 अप्रैल 2028
चैत्र शुक्ल 9
शनिवार, 24 मार्च 2029
चैत्र शुक्ल 9
यह तिथि कैसे निकली
त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।
उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।
क्यों मनाई जाती है
चैत्र शुक्ल नवमी — राम का जन्मदिन, और चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन। दोनों एक ही तिथि पर पड़ते हैं, यह संयोग नहीं: नौ रातों की उपासना का समापन उसी अवतार पर होता है जो अधर्म के अंत के लिए आया। जन्म का समय भी लिखा हुआ है — वाल्मीकि रामायण कहती है चैत्र शुक्ल नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न, अभिजित मुहूर्त, दोपहर। इसीलिए पूजा दोपहर में होती है, सुबह या शाम को नहीं — मध्याह्न ही राम का जन्म काल है।
कथा
पुत्रकामेष्टि
दशरथ की तीन रानियाँ थीं पर कोई संतान नहीं। ऋष्यशृंग ऋषि ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया।
खीर
यज्ञ से अग्निदेव प्रकट हुए और दिव्य खीर का पात्र दिया। दशरथ ने वह खीर तीनों रानियों में बाँट दी।
चार पुत्र
कौशल्या को राम, कैकेयी को भरत, सुमित्रा को लक्ष्मण और शत्रुघ्न — दो, क्योंकि उन्हें दोनों बहनों ने अपने हिस्से में से दिया था।
मध्याह्न
राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को दोपहर में हुआ — पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न। रामचरितमानस लिखती है: ‘भए प्रगट कृपाला दीनदयाला’।
क्यों
कारण रावण था — जिसे वर था कि देव-दानव कोई न मार सके, पर उसने मनुष्य को गिनती में नहीं लिया। इसीलिए विष्णु मनुष्य होकर आए।
सामग्री
- राम दरबार का चित्र — राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान
- पालना और छोटी बाल-राम की प्रतिमा (जहाँ जन्म उत्सव मनाते हैं)
- तुलसी दल — विष्णु अवतार का भोग बिना तुलसी नहीं
- पंचामृत, गंगाजल, कलश
- पीले वस्त्र, पीले फूल, कमल
- धनिया पंजीरी और गुड़-धनिया — रामनवमी का पारंपरिक प्रसाद
- केला, ककड़ी और मौसमी फल
- रामचरितमानस या सुंदरकांड की पुस्तक
पूजा विधि
1
स्नान और संकल्प
प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प। जो नवरात्रि का व्रत रखे हैं उनका पारण आज ही है।
2
मध्याह्न पूजन
पूजा दोपहर में, अभिजित मुहूर्त के आसपास — यही जन्म का समय है। कलश स्थापना, पंचामृत अभिषेक, पीले वस्त्र और तुलसी दल।
3
जन्मोत्सव
ठीक मध्याह्न पर शंख, घंटा और ‘राम जन्म भयो’ का उद्घोष। पालने में बाल-राम को झुलाएँ।
4
पाठ
रामचरितमानस के बालकांड का जन्म प्रसंग, या सुंदरकांड, या राम रक्षा स्तोत्र।
5
भोग
धनिया पंजीरी, गुड़-धनिया, फल और खीर। तुलसी दल अवश्य।
6
कन्या पूजन और पारण
नवरात्रि का समापन — कन्या पूजन के बाद व्रत खोलें।
क्या करें
- पूजा दोपहर में करें, सुबह नहीं — राम का जन्म मध्याह्न में हुआ था और यही इस दिन का अपना नियम है।
- भोग में तुलसी दल अवश्य रखें; विष्णु के किसी भी अवतार का भोग बिना तुलसी अधूरा माना जाता है।
- नवरात्रि का व्रत रखा हो तो पारण आज कन्या पूजन के बाद ही करें।
- धनिया पंजीरी बनाएँ — रामनवमी का प्रसाद यही है, बाक़ी मिठाई बाद में।
- हनुमान का स्मरण साथ करें; राम दरबार में वे सदा हैं।
क्या न करें
- आज चावल और अनाज व्रत रखने वालों के लिए नहीं; फलाहार पर रहें।
- प्याज़, लहसुन, माँस और मदिरा घर में नहीं।
- तुलसी के पत्ते आज न तोड़ें — एक दिन पहले तोड़कर रखें।
- पूजा से पहले कुछ न खाएँ, और मध्याह्न पूजन टालें नहीं।
- आज किसी का अपमान या कटु वचन नहीं; रामनवमी की पूरी कथा मर्यादा की है।
आरती
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन
श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुंदरम्।
पटपीत मानहुँ तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥
भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंदकंद कोशल चंद दशरथ नंदनम्॥
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदार अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चापधर संग्राम जित खरदूषणम्॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनम्॥
मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
करुणा निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥
आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।
वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।
