वसंत पंचमी कब है?
उत्तर
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
सरस्वती पूजा, माघ शुक्ल पंचमी।
उसी दिन क्यों
- यह कौन-सी तिथि है
- माघ शुक्ल 5
सामान्य नियम से: वह दिन जिसके सूर्योदय पर यह तिथि चल रही हो।
उसके बाद
मंगलवार, 01 फ़रवरी 2028
माघ शुक्ल 5
शुक्रवार, 19 जनवरी 2029
माघ शुक्ल 5
यह तिथि कैसे निकली
त्योहार एक स्थिति है, तारीख़ नहीं। चांद्र मास का नाम उस राशि से पड़ता है जिसमें सूर्य उस अमावस्या पर हो जो मास आरंभ करती है, और तिथि सूर्य से चंद्रमा की दूरी है, बारह-बारह अंश में। दोनों उसी गणना से आते हैं जिससे यह साइट कुंडली बनाती है।
उत्तर भारत मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिनता है, इसलिए कृष्ण पक्ष अगले मास का नाम लेता है — वही दिन पुणे में श्रावण कृष्ण तृतीया है और दिल्ली में भाद्रपद कृष्ण तृतीया। यहाँ उत्तर की गणना है, और तिथि ऊपर छपी है ताकि कुछ भी मानना न पड़े।
क्यों मनाई जाती है
माघ शुक्ल पंचमी — सरस्वती का प्रकट दिवस और वसंत ऋतु का पहला दिन। कथा यह है कि ब्रह्मा ने सृष्टि रची तो वह मौन थी, कोई ध्वनि नहीं थी; तब उन्होंने कमंडल से जल छिड़का और वीणा लिए एक देवी प्रकट हुईं — उन्होंने तार छेड़ा और संसार को स्वर मिला। पीला रंग सरसों के खेतों से है, जो इसी समय पूरे उत्तर भारत में खिलते हैं। यह वर्ष के तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है — आज कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे हो सकता है, और यही कारण है कि बच्चों की अक्षर-आरंभ (विद्यारंभ) आज ही कराई जाती है।
कथा
मौन सृष्टि
ब्रह्मा ने जीव और वनस्पति बनाए, पर सब चुप था। कहीं कोई स्वर नहीं, कोई भाषा नहीं।
जल की बूँदें
विष्णु की अनुमति से ब्रह्मा ने कमंडल से जल छिड़का। पृथ्वी पर पड़ते ही कंपन हुआ।
वीणावादिनी
एक चतुर्भुजी देवी प्रकट हुईं — एक हाथ में वीणा, एक में पुस्तक, एक में माला, एक वरमुद्रा में। श्वेत वस्त्र, श्वेत कमल।
पहला स्वर
ब्रह्मा ने कहा — वीणा बजाओ। तार छिड़ते ही संसार को स्वर मिला, नदियों को कल-कल, पवन को सरसराहट, जीवों को वाणी। वे सरस्वती कहलाईं।
पंचमी
वह दिन माघ शुक्ल पंचमी था। इसीलिए आज वाणी, विद्या और कला की पूजा होती है।
सामग्री
- सरस्वती की प्रतिमा या चित्र — श्वेत वस्त्र में
- पीले वस्त्र, पीले फूल (गेंदा या सरसों के फूल)
- बूँदी, केसरिया भात या पीले चावल — दिन का भोग
- बेर और गन्ना — इसी ऋतु के फल
- वीणा, पुस्तक, कलम, वाद्य या औज़ार — जो जिसकी विद्या हो
- श्वेत चंदन, अक्षत, रोली
- दवात और नई कलम — बच्चों के विद्यारंभ के लिए
- मोर पंख और हल्दी
पूजा विधि
1
पीत वस्त्र
प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र पहनें। घर में पीले फूल और पीला भोजन — दिन का रंग ही यही है।
2
स्थापना
पूर्व दिशा में चौकी पर श्वेत वस्त्र, उस पर सरस्वती की प्रतिमा। सामने अपनी पुस्तकें, वाद्य, क़लम या औज़ार रखें।
3
पूजन
श्वेत चंदन, अक्षत, पीले फूल, धूप-दीप। भोग में बूँदी या केसरिया भात, बेर और गन्ना।
4
सरस्वती वंदना
‘या कुन्देन्दुतुषारहारधवला’ का पाठ, फिर आरती।
5
विद्यारंभ
बच्चे को गोद में बिठाकर पहली बार अक्षर लिखवाएँ — परंपरा में चावल या हल्दी पर उँगली से ‘ॐ’ या ‘अ’। अबूझ मुहूर्त है, समय देखने की ज़रूरत नहीं।
6
विसर्जन
जहाँ मूर्ति स्थापित की हो वहाँ अगले दिन विधिपूर्वक विसर्जन — बंगाल और पूर्व में यही परंपरा है।
क्या करें
- बच्चों का विद्यारंभ आज ही कराएँ — यह वर्ष के तीन अबूझ मुहूर्तों में से एक है, मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं।
- अपनी पुस्तकें, वाद्य या औज़ार पूजा में रखें — सरस्वती की पूजा उसी से होती है जिससे आप सीखते हैं।
- पीला पहनें और पीला भोग लगाएँ; सरसों के फूल सबसे उपयुक्त हैं।
- आज विवाह, गृहप्रवेश, नया काम — सब बिना मुहूर्त शुरू किया जा सकता है।
- प्रतिमा स्थापित करें तो विसर्जन का दिन पहले से तय कर लें।
क्या न करें
- आज पुस्तक, क़लम या वाद्य पर पैर न लगे — यह इस दिन का सबसे कड़ा नियम है।
- काले वस्त्र न पहनें।
- आज पेड़ न काटें और फ़सल न काटें; वसंत का पहला दिन है।
- किसी को अपशब्द न कहें — वाणी की देवी का दिन है, यह नियम प्रतीकात्मक नहीं माना जाता।
- तामसिक भोजन, माँस और मदिरा नहीं।
आरती
ॐ जय सरस्वती माता
ॐ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनि, त्रिभुवन विख्याता॥
चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
बाएँ कर में वीणा, दाएँ कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तम का, जग से नाश करो॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई नर गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥
आकाश का अपना कैलेंडर है। आपका भी।
वही गणना आपके जन्म-क्षण पर — हर भाव, हर ग्रह, हर दशा तिथियों सहित।
