गंडमूल नक्षत्र: संधि नक्षत्र में जन्म

छह गंडांत नक्षत्र, इनमें जन्म क्यों देखा जाता है, और शास्त्रोक्त गंडमूल शांति।

कारक ग्रह
संधि नक्षत्र

गण्डमूल दोष तब बनता है जब जन्म-चन्द्र छह संधि नक्षत्रों में से किसी एक में हो — अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती — जो राशि-समूहों की संधि-स्थलों पर केतु अथवा बुध द्वारा शासित हैं।

इसका अर्थ

संधि-जन्म कर्म से आवेशित होता है। जातक असामान्य रूप से तीव्र, प्रायः प्रतिभाशाली होता है, किन्तु प्रारम्भिक वर्ष (विशेषकर पहले 27 दिन, फिर बाल्यकाल) संवेदनशील रहते हैं। शास्त्रीय उपाय — उसी नक्षत्र की आवृत्ति पर गण्डमूल शान्ति पूजा — प्रारम्भिक बाधा को दूर कर देता है।

प्रायः किस रूप में प्रकट होता है

  • संवेदनशील शैशवावस्था और बाल्यकाल।
  • तीव्र, गहन व्यक्तित्व जिसमें प्रबल पसंद-नापसंद हो।
  • प्रायः शोध, रहस्यवाद अथवा तकनीकी कौशल में असाधारण प्रतिभा।
  • पिता, वित्त अथवा स्वास्थ्य से जुड़ी प्रारम्भिक जीवन-बाधा संभव।
  • शान्ति के पश्चात — स्वाभाविक नेतृत्व और गहराई।

जब यह उपस्थित हो

आपका जन्म गण्डमूल नक्षत्र में हुआ था। गण्डमूल शान्ति के पश्चात (आदर्श रूप से जन्म के 27 दिन बाद, किन्तु किसी भी आयु में किया जा सकता है), दोष की धार कम हो जाती है और प्रतिभा का पक्ष पूर्ण रूप से प्रकट हो जाता है।

जब यह न हो

आपका जन्म-नक्षत्र संधि-नक्षत्र नहीं है। गण्डमूल दोष लागू नहीं होता।

शास्त्रोक्त उपाय

  1. 01

    गण्डमूल शान्ति पूजा

    जन्म के पश्चात उसी नक्षत्र की अगली आवृत्ति पर सम्पन्न — श्रेष्ठतम मंदिर में अथवा योग्य ज्योतिषी के साथ।

  2. 02

    स्वामी-ग्रह का मंत्र

    प्रतिदिन केतु मंत्र (अश्विनी, मघा, मूल) अथवा बुध मंत्र (अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) का 108 बार जप करें।

  3. 03

    नक्षत्र अनुसार दान

    केतु नक्षत्रों हेतु काले तिल और धूसर कम्बल; बुध नक्षत्रों हेतु हरी मूँग दाल और हरे वस्त्र।

  4. 04

    नक्षत्र-अनुरूप रंग

    केतु-शासित हेतु धुएँ जैसा धूसर, बुध-शासित हेतु हरा — संगत दिन धारण करें।

  5. 05

    गणेश पूजन

    प्रतिदिन गणेश आरती — गणेश सभी संधि-संबंधी विषयों के लिए सार्वभौमिक विघ्न-हर्ता हैं।

  6. 06

    सुब्रह्मण्य मंदिर दर्शन

    मुरुगन / सुब्रह्मण्य मंदिरों में जाएँ — गण्डमूल जातकों के रक्षक देवता।

सम्बद्ध विवरण

रंग
धूसर अथवा पन्ने जैसा हरा (स्वामी के अनुसार)
दिन
बुधवार अथवा शनिवार
अंक
5
रत्न
लहसुनिया (केतु नक्षत्र) / पन्ना (बुध नक्षत्र)
धातु
चांदी अथवा पंचधातु
दिशा
दक्षिण
देवता
गणेश एवं सुब्रह्मण्य
मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः

तीव्रता कैसे आँकी जाती है

केवल यह कह देना कि दोष है, अपने आप में लगभग कुछ नहीं बताता। हमारी रिपोर्ट कुंडली से इसे 0–100 अंक देती है और श्रेणी छापती है:

  • 75+ अत्यधिक
  • 55+ प्रबल
  • 30+ मध्यम
  • 1+ अल्प

सामान्य प्रश्न

क्या मेरी कुंडली में गण्डमूल दोष है?
यह केवल आपकी जन्म कुंडली से ही तय हो सकता है — जन्म तिथि, सटीक समय और स्थान से। आपका जन्म गण्डमूल नक्षत्र में हुआ था। गण्डमूल शान्ति के पश्चात (आदर्श रूप से जन्म के 27 दिन बाद, किन्तु किसी भी आयु में किया जा सकता है), दोष की धार कम हो जाती है और प्रतिभा का पक्ष पूर्ण रूप से प्रकट हो जाता है।
यदि गण्डमूल दोष न हो तो?
आपका जन्म-नक्षत्र संधि-नक्षत्र नहीं है। गण्डमूल दोष लागू नहीं होता।
गण्डमूल दोष के उपाय क्या हैं?
शास्त्रोक्त उपायों में गण्डमूल शान्ति पूजा, स्वामी-ग्रह का मंत्र, नक्षत्र अनुसार दान सम्मिलित हैं। कोई भी रत्न धारण करने से पूर्व योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य करें।
गण्डमूल दोष का कारक ग्रह कौन है?
संधि नक्षत्र। संधि-जन्म कर्म से आवेशित होता है। जातक असामान्य रूप से तीव्र, प्रायः प्रतिभाशाली होता है, किन्तु प्रारम्भिक वर्ष (विशेषकर पहले 27 दिन, फिर बाल्यकाल) संवेदनशील रहते हैं। शास्त्रीय उपाय — उसी नक्षत्र की आवृत्ति पर गण्डमूल शान्ति पूजा — प्रारम्भिक बाधा को दूर कर देता है।

क्या यह आपकी कुंडली में है?

दोष रिपोर्ट चौदहों दोषों को आपकी अपनी जन्म कुंडली पर जाँचती है — क्या बनता है, क्या निरस्त होता है, तीव्रता कितनी है, और क्या करें। आपके सटीक जन्म समय से गणना, हिन्दी या अंग्रेज़ी में।

अन्य दोष

यह सामग्री चिंतन और मार्गदर्शन हेतु है। यह चिकित्सकीय, विधिक अथवा वित्तीय परामर्श नहीं है। कोई भी रत्न धारण करने से पूर्व योग्य ज्योतिषी से, और किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय हेतु सम्बन्धित विशेषज्ञ से परामर्श करें।