केमद्रुम दोष: एकाकी चंद्रमा

चंद्रमा के दोनों ओर द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह नहीं। मन और मनोबल पर इसका क्या अर्थ है, और कौन-सी स्थितियाँ इसे निरस्त कर देती हैं।

कारक ग्रह
एकाकी चन्द्र
मुख्य प्रभाव-क्षेत्र
भावनात्मक संबल

केमद्रुम दोष तब बनता है जब चन्द्र के ठीक पूर्व और पश्चात के भावों (चन्द्र से 2रे और 12वें) में कोई ग्रह न हो और कोई ग्रह चन्द्र के साथ युति में न हो। चन्द्र कुंडली के आकाश में अकेला खड़ा रहता है।

यह कैसे बनता है

केमद्रुम दोष तब बनता है जब चंद्रमा से दूसरे और बारहवें भाव में सूर्य तथा राहु-केतु के अतिरिक्त कोई ग्रह न हो, और चंद्रमा के साथ भी कोई ग्रह न बैठा हो — अर्थात् चंद्रमा निराश्रित हो।

यह पृष्ठ नियम समझाता है। यह लागू होता है या नहीं, यह आपकी कुंडली तय करेगी।

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इसका अर्थ

चन्द्र मन और भावनात्मक सहयोग-तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है। किसी ग्रह-पड़ोसी के बिना मन को असमर्थन का अनुभव होता है — जातक प्रायः लोगों के बीच भी भावनात्मक एकाकीपन अनुभव करता है। यह दोष शुभ ग्रहों की दृष्टि, बलवान चन्द्र, अथवा गुरु/शुक्र/बुध की युति से निरस्त हो जाता है।

प्रायः किस रूप में प्रकट होता है

  • भीड़ में भी अकेलेपन का अनुभव।
  • मन में उतार-चढ़ाव, भावनात्मक थकान।
  • 30 के दशक तक धन अनियमित रूप से आता-जाता रहता है।
  • प्रारम्भिक जीवन में धीमी प्रगति, बाद में अचानक उत्थान।
  • गहन आंतरिक जीवन, प्रबल ध्यान-क्षमता।

जब यह उपस्थित हो

आपका चन्द्र एकाकी है। सहायक परिवार में भी आपने बचपन से भावनात्मक रूप से अकेला अनुभव किया होगा। दोष साथ, इष्ट-देव के प्रति श्रद्धा, और निरंतर चन्द्र-शान्ति अभ्यास से कम होता है।

जब यह न हो

आपके चन्द्र के साथ अथवा निकट भावों में सहायक ग्रह हैं। केमद्रुम दोष सक्रिय नहीं है।

शास्त्रोक्त उपाय

  1. 01

    सोमवार को चन्द्र-आराधना

    प्रत्येक सोमवार प्रातः शिवलिंग पर जल, दूध और श्वेत पुष्प अर्पित करें।

  2. 02

    श्वेत-अन्न का दान

    सोमवार को चावल, दूध, चीनी, दही अथवा श्वेत वस्त्र का दान करें।

  3. 03

    चन्द्र बीज मंत्र

    सोमवार को 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः' का 108 बार जप करें।

  4. 04

    साथ का संग करें

    समुदाय का विकास करें — कीर्तन-मण्डल, सत्संग, नियमित पारिवारिक संपर्क। केमद्रुम साथ से कमजोर पड़ता है।

  5. 05

    चांदी में मोती

    प्राकृतिक मोती चांदी में, दाहिने हाथ की कनिष्ठा अंगुली में धारण करें।

  6. 06

    कृष्ण-भक्ति

    श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ और कृष्ण-भजन — कृष्ण ब्रह्मांडीय मित्र-देव हैं।

सम्बद्ध विवरण

रंग
श्वेत
दिन
सोमवार
अंक
2
रत्न
मोती
धातु
चांदी
दिशा
वायव्य (उत्तर-पश्चिम)
देवता
भगवान कृष्ण / चन्द्र
मंत्र
ॐ सोम सोमाय नमः

तीव्रता कैसे आँकी जाती है

केवल यह कह देना कि दोष है, अपने आप में लगभग कुछ नहीं बताता। हमारी रिपोर्ट कुंडली से इसे 0–100 अंक देती है और श्रेणी छापती है:

  • 75+ अत्यधिक
  • 55+ प्रबल
  • 30+ मध्यम
  • 1+ अल्प

सामान्य प्रश्न

केमद्रुम दोष कैसे बनता है?
केमद्रुम दोष तब बनता है जब चंद्रमा से दूसरे और बारहवें भाव में सूर्य तथा राहु-केतु के अतिरिक्त कोई ग्रह न हो, और चंद्रमा के साथ भी कोई ग्रह न बैठा हो — अर्थात् चंद्रमा निराश्रित हो।
क्या मेरी कुंडली में केमद्रुम दोष है?
यह केवल आपकी जन्म कुंडली से ही तय हो सकता है — जन्म तिथि, सटीक समय और स्थान से। आपका चन्द्र एकाकी है। सहायक परिवार में भी आपने बचपन से भावनात्मक रूप से अकेला अनुभव किया होगा। दोष साथ, इष्ट-देव के प्रति श्रद्धा, और निरंतर चन्द्र-शान्ति अभ्यास से कम होता है।
यदि केमद्रुम दोष न हो तो?
आपके चन्द्र के साथ अथवा निकट भावों में सहायक ग्रह हैं। केमद्रुम दोष सक्रिय नहीं है।
केमद्रुम दोष के उपाय क्या हैं?
शास्त्रोक्त उपायों में सोमवार को चन्द्र-आराधना, श्वेत-अन्न का दान, चन्द्र बीज मंत्र सम्मिलित हैं। कोई भी रत्न धारण करने से पूर्व योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य करें।
केमद्रुम दोष का कारक ग्रह कौन है?
एकाकी चन्द्र। चन्द्र मन और भावनात्मक सहयोग-तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है। किसी ग्रह-पड़ोसी के बिना मन को असमर्थन का अनुभव होता है — जातक प्रायः लोगों के बीच भी भावनात्मक एकाकीपन अनुभव करता है। यह दोष शुभ ग्रहों की दृष्टि, बलवान चन्द्र, अथवा गुरु/शुक्र/बुध की युति से निरस्त हो जाता है।

क्या यह आपकी कुंडली में है?

दोष रिपोर्ट चौदहों दोषों को आपकी अपनी जन्म कुंडली पर जाँचती है — क्या बनता है, क्या निरस्त होता है, तीव्रता कितनी है, और क्या करें। आपके सटीक जन्म समय से गणना, हिन्दी या अंग्रेज़ी में।

अन्य दोष

यह सामग्री चिंतन और मार्गदर्शन हेतु है। यह चिकित्सकीय, विधिक अथवा वित्तीय परामर्श नहीं है। कोई भी रत्न धारण करने से पूर्व योग्य ज्योतिषी से, और किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय हेतु सम्बन्धित विशेषज्ञ से परामर्श करें।