अष्टकवर्ग — सारांश
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अष्टकवर्ग — सारांश — बिंदु कैसे गिने जाते हैं, योग हमेशा कितना आता है, और अपनी तालिका कैसे पढ़ें।
0गिनती कैसे होती है
सात ग्रहों में से हर एक को आठ दाता अंक देते हैं — बाक़ी छह, स्वयं वह ग्रह, और लग्न — इससे हर राशि को 0 से 8 तक की गिनती मिलती है, जिसे बिंदु कहते हैं। सातों तालिकाएँ जोड़कर सर्वाष्टकवर्ग बनता है, जिसकी बारह राशियों का योग हर कुंडली में सदा 337 होता है। इसलिए औसत राशि पर लगभग 28 बिंदु आते हैं।
अपनी तालिका कैसे पढ़ें
30 से ऊपर की राशि बलवान है और 25 से नीचे की नहीं, और तुलना अपनी ही बारह राशियों के बीच करनी चाहिए, किसी और की कुंडली से नहीं। अधिक बिंदु वाली राशि से गुज़रता गोचर कम बिंदु वाली से ज़्यादा फल देता है — तालिका असल में इसी काम आती है।
वे अंक जो कभी नहीं बदलते
- प्रति ग्रह दाता
- 8
- एक राशि में अधिकतम बिंदु
- 8
- सर्वाष्टकवर्ग का कुल योग, हर कुंडली में
- 337
- प्रति राशि औसत
- लगभग 28 (337 ÷ 12)
- बलवान / निर्बल
- 30 से ऊपर / 25 से नीचे
इस पर कुछ करना हो तो
ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।
अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सर्वाष्टकवर्ग का कुल योग कितना होता है?
- 337 — हर बनी हुई कुंडली में यही। इसलिए काम की तुलना अपनी ही बारह राशियों के बीच है, किसी और के योग से नहीं।
- कितने बिंदु अच्छे माने जाते हैं?
- 30 से ऊपर बलवान, 25 से नीचे निर्बल, और लगभग 28 औसत।
- सर्वाष्टकवर्ग से अंतर क्या है?
- यह एक ग्रह की तालिका है; सर्वाष्टकवर्ग सातों को जोड़कर बनता है।
