षड्बल — ग्रह बल
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षड्बल — ग्रह का बल जिन छह स्रोतों से जोड़ा जाता है, और हर एक क्या नापता है।
0षड्बल क्या है
षड्बल छह बलों का जोड़ है। ग्रह केवल बलवान या निर्बल नहीं होता: वह उच्च का होकर भी निष्प्रभ हो सकता है क्योंकि दिशा ग़लत है, और शत्रु राशि में होकर भी प्रबल — क्योंकि वक्री है। रिपोर्ट एक अंक छापती है; ये वही छह हैं जिनसे वह जोड़ा गया।
छह बल
- स्थान बल
- स्थिति — उच्च, स्वराशि, मूलत्रिकोण और वर्ग कुंडलियाँ
- दिग् बल
- दिशा — हर ग्रह चार केंद्रों में से एक में सबसे बलवान होता है
- काल बल
- काल — दिन या रात, पक्ष, और जन्म का वर्ष, मास तथा होरा
- चेष्टा बल
- गति — वक्री और स्तंभित ग्रह अधिक, तेज़ मार्गी कम
- नैसर्गिक बल
- स्वभाव — सूर्य से शनि तक एक निश्चित क्रम, हर कुंडली में वही
- दृक् बल
- दृष्टि — शुभ और पाप ग्रह अन्यत्र से जो डालते हैं
नैसर्गिक बल, पूरा
वह इकलौता बल जो हर कुंडली में एक जैसा है — एक निश्चित क्रम, अधिक से कम।
- सूर्य
- 60
- चंद्र
- 51.43
- शुक्र
- 42.85
- गुरु
- 34.28
- बुध
- 25.7
- मंगल
- 17.14
- शनि
- 8.57
इस पर कुछ करना हो तो
ज्योतिष में उपाय एक कर्म है, खरीद नहीं — व्रत, मंत्र, सही दिन का दान। जहाँ विधिवत अनुष्ठान चाहिए, वहाँ ये तीन काम आते हैं: आपके नाम से कराई गई पूजा, मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा, या संबंधित ग्रह के मंत्र से अभिमंत्रित वस्तु।
अपनी कुंडली में इसका क्या अर्थ है?
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- षड्बल के छह बल कौन-से हैं?
- स्थान बल, दिग् बल, काल बल, चेष्टा बल, नैसर्गिक बल, दृक् बल
- क्या उच्च का ग्रह भी निर्बल हो सकता है?
- हाँ — उच्च होना केवल स्थान बल का एक हिस्सा है, और स्थान बल छह में से एक। उच्च का ग्रह यदि अपनी सबसे कमजोर दिशा में हो, दिन के प्रतिकूल भाग में हो, और उस पर पाप दृष्टि हो, तो उसका जोड़ उस सामान्य ग्रह से भी कम बैठता है जिसके बाक़ी पाँच बल अनुकूल हैं।
